: सूदखोरो के कर्ज के तले दबे व्यक्ति ने की आत्महत्या की कोशिश, सड़क पर आया परिवार, पुलिस- प्रशासन के अधिकारी मौन तो सुनेगा कौन
admin
Wed, Aug 28, 2024
■■भारत में, ब्याज पर पैसे देना कानूनी है, लेकिन इसे किसी का व्यवसाय नहीं बनाया जा सकता. ब्याज पर पैसे देने के लिए, मनी लेंडिंग एक्ट के तहत लाइसेंस लेना ज़रूरी है. बैंकों और एनबीएफ़सी को रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया से बैंकिंग लाइसेंस मिलता है, जबकि आम लोगों को ज़िला स्तर पर साहूकारी अधिनियम के तहत लाइसेंस मिलता है. बिना लाइसेंस के ब्याज पर पैसे देना गैरकानूनी है
कानपुर/ सूदखोरों की प्रताड़ना से परेशान होकर एक व्यक्ति ने आत्महत्या का कदम उठाया है। बताया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था आनन- फानन में उसे अस्पताल मे भर्ती किया गया डॉक्टर के अनुसार पीड़ित व्यक्ति की हालत खतरे से बाहर बनी हुई है। हमारे संवाददाता ने जब पीड़ित व्यक्ति से बात की तो उसके द्वारा बताया गया कि वह पिछले 6 साल से स्थानीय सूदखोर से कर्जा लेकर अपने कामों को अंजाम दे रहा था। लेकिन आज तक ब्याज की धनराशि देते देते मूलधन भी वापस नहीं कर पाया। बताया कि ₹700000 का 5% से हिसाब से हर महीने ₹30000 का ब्याज भरते भरते थक हार चुका हूं उसकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है। पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि ब्याज भरते भरते उसने अपना एक मकान भी बेच दिया। लेकिन मूलधन अभी तक वापस नहीं हो पाया है पीड़ित व्यक्ति के बच्चों ने रोते रोते बताया कि जाए तो हम जाएं कहां ना अब उनके पास मकान है। यह पहला मामला नहीं है।

उत्तर प्रदेश में ऐसे कई मामले हो चुके हैं आपको हम बताते हैं कानपुर निवासी सर्वेश ने सूदखोरों की प्रताड़ना से आजिज आकर छह जनवरी को ट्रेन के सामने कूद कर जान दे दी। सूदखोरों की प्रताड़ना से तंग आकर जान गंवाने की यह कोई नई घटना नहीं है। इसके बावजूद लोग सूदखोरों के जाल में फंसते ही रहते हैं और पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौन साधे रहते हैं।
जानकारी मिली है कि जिले में शहर से लेकर गांवों तक सूदखोरों का तगड़ा नेटवर्क है। इनकी नजर हमेशा जरूरतमंदों पर रहती है। और इनके कारिंदे ऐसे लोगों की दुखती रग पर हाथ रखते हुए उन्हें अपने आका तक ले जाते हैं। अगर गिरवी रखने को कुछ न मिला, तब भी बनावटी दरियादिली दिखाते हुए कर्ज दिया जाता है। एक बार जिसने सूदखोरों से कर्ज ले लिया, फिर उससे उबरना आसान नहीं रहता। आखिर में उन्हें ब्याज चुका कर अपना सब कुछ गवां देना पड़ता है। 40 लाख से ज्यादा आबादी वाले जिले में कहने को तो लिखा पढ़ी में निर्धारित दर पर ब्याज पर पैसा देने वाले कई एक साहूकार हैं। यह सभी बैंक की निर्धारित ब्याज दर की तरह ही पैसा उधार देते हैं। लेकिन हकीकत में मनमाना ब्याज दर पर पैसा उधार देने वालों की संख्या जिले में सैकड़ों में है। प्रतिमाह निर्धारित समय पर ब्याज और किश्त का पैसा न मिलने पर सूदखोर चक्रवृद्धि ब्याज वसूलते हैं और उधार लेने वाले के घर के कीमती सामान भी जबरन उठा ले जाते हैं।
सूदखोरों के खिलाफ जिले में पुलिस और प्रशासन के स्तर से वर्षों से कोई अभियान नहीं चलाया गया है। सूदखोरी से संबंधित कोई बड़ी घटना जब सामने आ जाती है तो पुलिस और प्रशासनिक महकमा थोड़ी सक्रियता दिखाता है। इसके बाद फिर सभी बेफिक्र हो जाते हैं।
■■ रखें इन बातों का ध्यान, रहेंगे सुरक्षित■■
■ प्रयास यही करें कि सूदखोर से ब्याज पर पैसा उधार न लें।
■जरूरत पड़ने पर बैंक से ही पैसा उधार लें। अब बैंकों में कागजों आदि का बहुत ज्यादा तामझाम नहीं रह गया है।
■सूदखोर से पैसा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है तो ब्याज की दर और समयावधि तय कर लिखा पढ़ी कराएं।
■सूदखोर परेशान करे तो तत्काल नजदीकी थाने या पुलिस अधिकारियों को सूचना दें। इसे लेकर कभी संकोच न करें।
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