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मनरेगा घोटाले में ‘वसूली का तमाशा’, सजा पर सन्नाटा! : दोषियों पर कार्रवाई शून्य

Abid Hussain

Sun, Dec 21, 2025

मनरेगा घोटाले में ‘वसूली का तमाशा’, सजा पर सन्नाटा!

सीएम के निर्वाचन क्षेत्र गुदमी (बनबसा) में ₹1,1677 लाख की गड़बड़ी उजागर, दोषियों पर कार्रवाई शून्य

चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्वाचन क्षेत्र अंतर्गत बनबसा विकासखंड की ग्राम पंचायत गुदमी में मनरेगा योजना के तहत करीब ₹1.1677 लाख की वित्तीय गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र कटघरे में है। मनरेगा लोकपाल की जांच में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है, वसूली के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं—लेकिन दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई? बिल्कुल नहीं।

यही नहीं, आदेशों के बाद भी जमीनी कार्रवाई ठप है, जिससे यह मामला अब भ्रष्टाचार पर ‘शून्य सहनशीलता’ के दावों की कड़ी परीक्षा बन गया है।

लोकपाल जांच के बाद मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय ने संबंधित कर्मियों से धनराशि वसूली के निर्देश जारी किए। जिला विकास अधिकारी के मुताबिक, प्रकरण से जुड़े 23 अहम प्रपत्र संलग्न हैं। वसूली की जिम्मेदारी चम्पावत के खंड विकास अधिकारी अशोक अधिकारी को सौंपी गई है और तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए—पर मैदान में नतीजा शून्य।

सवालों की बौछार

● जब वित्तीय नियमों का उल्लंघन सिद्ध है, तो विभागीय/कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं?

●क्या सिर्फ पैसे वसूल लेना ही न्याय है, या सजा भी जरूरी नहीं?

●किसके संरक्षण में दोषियों पर हाथ डालने से परहेज किया जा रहा है?

पुराना खेल, नई फाइलें

जनपद के चारों विकासखंडों में मनरेगा के नाम पर मिलीभगत और सुनियोजित गड़बड़ियों की चर्चाएं लंबे समय से हैं। कई ग्राम पंचायतों में संपत्ति रजिस्टर का अभाव, डुप्लीकेट व फर्जी कार्य, और आपसी रिश्तेदारी का संरक्षण—ये सब मिलकर कार्रवाई की राह में दीवार बने हुए हैं।

एक जगह जमे अधिकारी, नियमों की खुलेआम अनदेखी

सूत्रों के मुताबिक, गुदमी में तैनात ग्राम विकास अधिकारी मूल नियुक्ति किसी अन्य विकासखंड की है और वेतन भी वहीं से आहरित होता है, फिर भी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हैं। यह ‘विशेष सुविधा’ आखिर किसके इशारे पर चल रही है?

सीएम के भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान पर सवाल

मुख्यमंत्री धामी भ्रष्टाचार पर सख्ती के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उन्हीं के क्षेत्र में घोटाला उजागर होने के बावजूद कार्रवाई की सुस्ती यह सवाल खड़ा करती है—वह ताकतवर कौन है, जो व्यवस्था को खुलेआम चुनौती दे रहा है?

डीएम के संज्ञान का इंतजार

हालांकि यह मामला अभी जिलाधिकारी मनीष कुमार के संज्ञान में नहीं आया है, लेकिन जैसे ही प्रकरण उनके सामने पहुंचेगा, क्षेत्रवासियों को कड़ी, निष्पक्ष और उदाहरणात्मक कार्रवाई की उम्मीद है।

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