मनिहारगोठ में रेलवे की तानाशाही! 50 साल पुराना गांव का रास्ता खोदकर : किया बंद, बुज़ुर्ग–बच्चे कैद, हादसों को खुला न्योता,
Abid Hussain
Tue, Dec 16, 2025
मनिहारगोठ में रेलवे की तानाशाही! 50 साल पुराना गांव का रास्ता खोदकर किया बंद, बुज़ुर्ग–बच्चे कैद, हादसों को खुला न्योता, मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज रास्ते को खुलवाए जाने की लगाई गुहार।
टनकपुर। अमृत भारत योजना और विकास के दावों के बीच रेलवे विभाग की मनमानी अब मानवीय संवेदनाओं को कुचलती नज़र आ रही है। ग्राम मनिहारगोठ स्थित रेलवे अंडरपास से कुएं वाली गली तक वर्षों पुराना आवागमन मार्ग रेलवे विभाग द्वारा जानबूझकर गड्ढे खोदकर अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे सैकड़ों ग्रामीणों का जीवन नारकीय बन गया है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह रास्ता कोई नया या अवैध नहीं, बल्कि पिछले 50–60 वर्षों से ग्राम सभा का मान्य रास्ता रहा है, जिससे ग्रामीणों का रोज़मर्रा का आवागमन, बच्चों का स्कूल जाना, बुज़ुर्गों का अस्पताल पहुँचना और किसानों का खेतों तक पहुँचना संभव होता था। लेकिन रेलवे विभाग ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इस रास्ते को खोदकर बंद कर दिया।
✍️बुज़ुर्ग, बच्चे और मवेशी—सब संकट में
रेलवे द्वारा खोदे गए गहरे गड्ढों के कारण बारिश के दौरान कई ग्रामीण गिरकर घायल हो चुके हैं। आए दिन मवेशी गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। हालत यह है कि अब पैदल चलना तक असंभव हो गया है। गांव के लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं।
✍️रेलवे की संवेदनहीनता पर सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रेलवे विभाग न केवल रास्ता बंद कर चुका है, बल्कि पैदल रास्तों पर भी लगातार नए गड्ढे खोदे जा रहे हैं, मानो ग्रामीणों को सबक सिखाया जा रहा हो। क्या यही है विकास? क्या रेलवे कानून से ऊपर है?
✍️जनप्रतिनिधियों का फूटा गुस्सा
अल्पसंख्यक युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष मुवश्शिर अली उर्फ गोलू, पूर्व ग्राम प्रधान अमजद हुसैन और वर्तमान ग्राम प्रधान शहाना खातून ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों का हनन बताया है। उन्होंने कहा कि रेलवे विभाग की यह हरकत न केवल अमानवीय है, बल्कि किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण भी।
✍️मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
पीड़ित ग्रामीणों ने माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार से मांग की है कि इस गंभीर मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर रेलवे विभाग को गड्ढे भरवाने और रास्ता बहाल करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
>■ सवाल यह है कि अगर किसी की हादसे में जान चली गई तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
>■रेलवे विभाग या वह सिस्टम, जो शिकायतों के बाद भी आंख मूंदे बैठा है?
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो वे मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे विभाग की होगी।
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मुख्यमंत्री से करी मांग