डीएम की फटकार का कमाल—तीन साल से रूठा पानी अब चार दिन में प्रियंका के : घर आने को तैयार
Abid Hussain
Mon, Nov 17, 2025
डीएम की फटकार का कमाल—तीन साल से रूठा पानी अब चार दिन में प्रियंका के घर आने को तैयार
जनता मिलन में 70 शिकायतें—डीएम बोले: “कोई बहाना नहीं चलेगा, काम तुरंत होना चाहिए!”
चम्पावत के जिला सभागार में सोमवार को जनता मिलन कार्यक्रम ऐसा लगा मानो जिले की सारी परेशानियाँ एक ही दिन छुट्टी मांगने चली आई हों। कुल 70 फरियादी अपनी-अपनी शिकायतें लेकर पहुँचे, और जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने भी सुपरहिट जज की तरह हर केस का “ऑन-द-स्पॉट डिस्पोज़ल” मोड में फैसला सुनाया।
घास जली, लेकिन उम्मीद नहीं
भैरवा वार्ड की आशा तड़ागी की घास जल गई। डीएम ने कहा—“घास गई तो क्या, राहत अभी आती है!” और सहकारिता विभाग को तुरंत मदद देने का आदेश दिया।
मानाढुंगा में सड़क का पानी बना मेहमान
भुवन चंद्र जोशी ने कहा—“साहब, सड़क का पानी रोज-रोज हमारे घर मेहमान बनकर घुसता है।”
डीएम ने PWD को आदेश दिया—“जाकर देखो, पानी को उसके असली घर भेजो!”
विस्थापन की मांग—परिवार बोले: ‘हमें सुरक्षित जगह चाहिए’
ढकना गांव की नारायणी देवी के परिवार को नई जगह दिलाने की बात पर डीएम ने एसडीएम और आपदा विभाग को कहा—“जमीन देखो, मानक देखो, और परिवार को सुरक्षित पहुंचाओ!”
बिजली कनेक्शन नहीं?—डीएम का वन-लाइनर: ‘तुरंत जोड़ो!’
दो शिकायतें बिजली कनेक्शन न मिलने की थीं। UPCL को डीएम ने सीधा आदेश—“कनेक्शन तुरंत दीजिए, अंधेरा हटाइए!”
और अब... सबसे बड़ी ब्रेकिंग—प्रियंका महर बनाम पानी विभाग
प्रियंका महर की कहानी सुनकर सभागार में सब चौंक गए।
तीन साल से पानी का कनेक्शन गायब, और गांव का कर्मचारी हर बार वही डायलॉग—
“JE से बात करा दूँगा…”
मतलब, “आज नहीं, कल देखेंगे!”
इस पर जिलाधिकारी साहब ने खुद लाइनमैन को लाइव कॉल लगाई।
फोन उठते ही डीएम ने कहा—
“भाई साहब, ये तीन साल का ‘JE-वाला-बहाना’ अब बंद। चार दिन में पानी प्रियंका के घर पहुँचना चाहिए, नहीं तो… अगली कॉल मैं नहीं, कार्रवाई करेगी।”
अब गांव में चर्चा है—
“प्रियंका के पानी की किस्मत बदली… वो भी सिर्फ एक फोन कॉल से!”
और लाइनमैन भी चार दिन का अलार्म सेट करके घर गया होगा।
अधिकारियों को आखिरी चेतावनी
जिलाधिकारी ने सभी विभागों से कहा
“काम समय पर करो, नहीं तो मेरा अगला फोन कॉल ‘मीठा’ नहीं होगा।”
कार्यक्रम में CDO, SDM, DDO, CMO समेत जिले के अधिकारी मौजूद रहे।
फरियादी संतुष्ट थे, और शिकायतें ऐसे निपट रहीं थीं जैसे कोई एक दिन का प्रशासनिक महाकुंभ लगा हो। यह जनता मिलन था… या ‘समस्या निवारण स्पीड शो’—कहना मुश्किल है!
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