चीनी अखरोट की तस्करी जोरों पर, सुरक्षा बल मौन—भारतीय राजस्व को भारी : नुकसान
Abid Hussain
Tue, Dec 23, 2025
टनकपुर/ भारत–नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में चीनी अखरोट की अवैध तस्करी तेजी से बढ़ती जा रही है। सूत्रों के अनुसार सीमावर्ती रास्तों से बड़ी मात्रा में सस्ते चीनी अखरोट देश के भीतर खपाए जा रहे हैं, जिससे सरकारी राजस्व को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
तस्कर बिना शुल्क और गुणवत्ता जांच के अखरोट बाजारों तक पहुंचा रहे हैं।सुरक्षा बलों और संबंधित एजेंसियों की ढिलाई के चलते यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होने से तस्करों के हौसले बुलंद हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी अखरोट सस्ते दामों पर बिकने से स्थानीय व पहाड़ी अखरोट उत्पादकों को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। साथ ही बिना मानक जांच के आयातित माल से उपभोक्ता स्वास्थ्य पर भी खतरा बना हुआ है।
अब सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग तस्करी पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाएंगे या फिर सुरक्षा तंत्र की चुप्पी यूं ही भारतीय राजस्व को नुकसान पहुंचाती रहेगी?
इस मामले में गोविंद बल्लभ पंत फाउंडेशन के अध्यक्ष नवीन चंद्र पंत ने चिंता जताते हुए कहा है कि भारतीय बाजारों में चीन निर्मित अखरोट आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं, जो न केवल स्थानीय उत्पादकों के लिए नुकसानदायक हैं बल्कि इससे भारतीय राजस्व को भी भारी क्षति पहुँच रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना स्पष्ट जांच और गुणवत्ता मानकों के विदेशी अखरोट बाजार में बिक रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए श्री पंत ने खाद्य विभाग से जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो यह अवैध आयात स्थानीय व्यापार और किसानों के हितों पर सीधा प्रहार साबित होगा। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि बाजारों में बिक रहे अखरोट की उत्पत्ति, गुणवत्ता और वैधता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।...
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