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खटीमा में महिला की हत्या का खुलासा — एसएसपी मणिकांत मिश्रा के सख्त रुख : से थर्राए अपराधी

Abid Hussain

Mon, Nov 10, 2025

■ खटीमा में महिला की हत्या का खुलासा — एसएसपी मणिकांत मिश्रा के सख्त रुख से थर्राए अपराधी

खटीमा"अपराध जो चाहे जितना शातिर हो, न्याय की राह से बच नहीं सकता!" इसी जज़्बे के साथ ऊधमसिंहनगर पुलिस ने खटीमा में हुई सनसनीखेज हत्या की गुत्थी सुलझा दी।1 नवंबर की रात को सब्ज़ी मंडी के पीछे रेलवे पटरी के पास झाड़ियों में पीले कट्टे से मिली महिला की लाश ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया था।पहचान हुई — सुनीता (24 वर्ष), पत्नी आनंद, निवासी पकडिया, थाना झनकईया के रूप में। एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस टीमों को तैनात कर दिया।400 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले गए, गवाहों से पूछताछ हुई और मुखबिरों की सूचना पर पुलिस ने हत्या के धागे जोड़े।कैमरों ने जो दिखाया, उसने कहानी बदल दी एक बाइक पर मृतका किसी व्यक्ति के साथ जाती दिखी।सूत्रों ने बताया, वह व्यक्ति था — उदयवीर शर्मा (59 वर्ष), ठेकेदार, निवासी बुलन्दशहर। 9 नवंबर को पुलिस ने दबोचा कातिल को!

पूछताछ में खुला राज —

पुलिस ने बताया कि 30 अक्टूबर को उदयवीर सुनीता को अपने किराए के कमरे पर ले गया।वहां विवाद हुआ, और गुस्से में आकर उसने सुनीता का गला दबाकर हत्या कर दी।अपनी “परिवार की बदनामी” के डर से शव को कट्टे में भरकर रेलवे पटरी किनारे फेंक दिया। बरामद साक्ष्य:हत्या में प्रयुक्त मोटरसाइकिल घटना के समय के कपड़े मृतका से संबंधित पर्दे की फोटो (अभियुक्त के मोबाइल से बरामद) अब हत्यारा सलाखों के पीछे है — पुलिस कर रही है आगे की विवेचना। टीम जिसने मौत के अंधेरे में न्याय की रोशनी जलाई: कोतवाली खटीमा, थाना झनकईया व एसओजी की संयुक्त टीम मे प्रभारी निरीक्षक वीरेन्द्र शाह, निरीक्षक देवेन्द्र गौरव, व0उ0नि0 ललित रावल, उ0नि0 अशोक काण्डपाल, उ0नि0 ललित बिष्ट, उ0नि0 विकास कुमार ,उ0नि0 भूपेन्द्र सिंह, उ0नि0 पंकज सिंह, महर का0 नवीन खोलिया, का0 कमल पाल, का0 दीपक कुमार, का0 रमेश जीना, का0 साकिर अली, का0 ललित वर्मा, म0का0 सुनीता, म0का0 पूजा, एसओजी टीमहे0का0 रविन्द्र बिष्ट, का0 पंकज बिनवाल, का0 नीरज शुक्ला, का0 राजेन्द्र कश्यप, का0 भूपेन्द्र आर्या शामिल रहे।

शायराना:

"क़त्ल की साज़िश चाहे कितनी गहरी क्यों न हो,

कानून की नज़र से बच नहीं सकता कोई दो क़दम भी हो।

मिश्रा साहब के तेवरों से कांप उठा ज़माना,

न्याय मिला सुनीता को, सलाम है खाकी परवाना!"

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