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बच्चों की गुहार—‘हक दिलाओ, सम्मान बचाओ’”

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“आठ साल से पेंशन को तरसता परिवार: शहीद समान जीवन जीने वाले सैनिक के : बच्चों की गुहार—‘हक दिलाओ, सम्मान बचाओ’”

Abid Hussain

Sun, May 3, 2026

■■ “पूर्व सैनिक परिवार को न्याय दिलाने में जुटी गौरव सेनानी कल्याण समिति”

बनबसा। आनंदपुर क्षेत्र में कुमाऊँ 8 रेजिमेंट के पूर्व हवलदार स्वर्गीय शाही चंद जी के परिवार को वर्ष 2017 से अब तक पेंशन नहीं मिल पाई है। उनके निधन के बाद से परिवार लगातार पेंशन के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हो सका।

परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। पेंशन न मिलने के कारण परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है और कर्ज में जीवन यापन कर रहा है।

स्थानीय लोगों ने भी इस मामले में चिंता जताई है और संबंधित विभाग से जल्द समाधान की मांग की है, ताकि परिवार को उनका हक मिल सके।

■■ फैमिली पेंशन मामले में जांच तेज, दिव्यांग बेटे के हक पर प्रशासन हरकत में

■■ ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स ने मांगी पुष्टि, चम्पावत सैनिक कल्याण कार्यालय से समन्वय

चम्पावत जनपद में एक पूर्व सैनिक परिवार की फैमिली पेंशन से जुड़ा मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। इस आशय की सूचना गौरव सेनानी कल्याण समिति के अध्यक्ष कैप्टन भानी चंद ने  दी है। उन्होंने बताया कि ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स रेजिमेंटल सेंटर की ओर से जारी एक आधिकारिक पत्र में स्वर्गीय हवलदार शाही चंद के दिव्यांग पुत्र प्रकाश चंद रजवार को फैमिली पेंशन दिए जाने के प्रकरण में विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

पत्र के अनुसार, जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय, चम्पावत द्वारा 8 दिसंबर 2025 को भेजे गए पत्र के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है। संबंधित विभाग से यह भी अनुरोध किया गया है कि वर्ष 2013 के पत्र की प्रति उपलब्ध कराई जाए । इस मामले में सभी संबंधित विभागों—जिला सैनिक कल्याण कार्यालय, कुमाऊं रेजिमेंटल सेंटर और आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस, अल्मोड़ा—को भी सूचना भेजी गई है, ताकि तथ्यों का मिलान कर जल्द निर्णय लिया जा सके।

सेना अधिकारियों ने इस प्रकरण में शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद पात्रता के आधार पर दिव्यांग आश्रित को पेंशन का लाभ मिल सकता है। यह मामला पूर्व सैनिक परिवारों के अधिकारों और उनकी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील माना जा रहा है, जिस पर अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।

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