जिलाधिकारी मनीष कुमार की जमीनी पहल- खिरद्वारी में पहली : बार पहुंचा विकास का कारवां
Abid Hussain
Sun, Nov 16, 2025
चंपावत। जनपद के सबसे दूरस्थ आदिम जाति गाँव खिरद्वारी में रविवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जैसा रहा। वर्षों से विकास की दौड़ में पिछड़ चुके इस गाँव में पहली बार जिला प्रशासन पूरे तंत्र के साथ पहुँचा और लोगों के घर–आँगन में ही सरकारी सेवाएँ उपलब्ध कराईं। इस व्यापक प्रशासनिक पहल के केंद्र में थे जिलाधिकारी मनीष कुमार, जिनकी संवेदनशीलता, जमीनी दृष्टि और मानव–केन्द्रित नेतृत्व शैली ने ग्रामीणों के मन में नई आशा का संचार किया।
■■ जिलाधिकारी बने ग्रामीणों के ‘अपने’— घर–आँगन में बैठकर सुनी जनता की पीड़ा
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने किसी औपचारिक मंच पर नहीं, बल्कि ग्रामीणों के आँगन में बैठकर उनकी समस्याएँ सुनीं। महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों से उनके अपने ही बीच में संवाद करते हुए उन्होंने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को पाट दिया। ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि—
>> “पहली बार किसी जिलाधिकारी को अपने घर के पास बैठकर बात करते देखा है।”
जिलाधिकारी ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा—
>> “विकास योजनाओं से नहीं, संवाद और विश्वास से आता है।”
विकास को घर–द्वार तक ले आया प्रशासन
बहुद्देशीय शिविर में स्वास्थ्य, आयुष, पशुपालन, कृषि, उद्यान, खाद्य एवं आपूर्ति, सामाजिक कल्याण जैसे विभाग पूरी टीम के साथ मौजूद रहे।
■■ दवाओं का वितरण
महिलाओं को लक्ष्मी व पोषण किट
पात्र परिवारों का पंजीकरण
शिक्षा–संबंधी मांगों पर तत्काल कार्रवाई
पेंशन, राशन कार्ड व रोजगार से जुड़ी सेवाएँ मौके पर उपलब्ध
गाँव के लोगों ने महसूस किया कि “अब विकास के लिए हमें नहीं जाना पड़ेगा, विकास हमारे पास आ रहा है।”
गाँव की वास्तविक समस्याओं का जमीनी निरीक्षण
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने दूरस्थ बस्तियों तक पैदल जाकर देखा कि—
रास्ते अत्यंत दुर्गम हैं
बरसात में नदी आवागमन रोक देती है
विद्यालय भवन जर्जर है
स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचने में देर होती है
उन्होंने विभागीय अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए।
ट्रॉली या पुल— निर्णय ग्रामीण करेंगे
खिरद्वारी के लोगों के जीवन से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या नदी पार करना है। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन दो स्पष्ट विकल्प देगा—
1. नदी पर ट्रॉली
2. स्थायी पुल
और अंतिम निर्णय ग्रामीण ही करेंगे। यह बयान उनकी लोकतांत्रिक और सहभागी कार्य शैली को दर्शाता है।
विद्यालय भवन का पुनर्निर्माण व कटाव के स्थायी समाधान की पहल
उन्होंने बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विद्यालय भवन का नया प्रस्ताव तैयार करने को कहा। साथ ही नदी के बदलते बहाव से खतरे को देखते हुए सिंचाई विभाग को स्थायी योजना बनाने के निर्देश दिए।
■■ नशा मुक्ति की पहल— जिलाधिकारी का विशेष आभार
ग्राम प्रधान निशा सामंत ने गाँव को नशा मुक्त बनाने की शपथ दिलाई, जिसे जिलाधिकारी ने अत्यंत सराहनीय कदम बताया। छात्रों ने रैली निकालकर संदेश दिया कि गाँव स्वस्थ होगा तो विकास भी तेज होगा।
महिलाओं से संवाद— एपीडी बिम्मी जोशी का भावुक वक्तव्य
शिविर के दौरान एपीडी बिम्मी जोशी ने महिलाओं को भरोसा दिलाते हुए कहा:
> “महिला का दर्द महिला ही समझती है। प्रशासन अब आपके द्वार है— आपकी हर समस्या का समाधान आपका फोन आने पर होगा।”
उन्होंने अपना व जिलाधिकारी का नंबर नोट करवाकर महिलाओं में सुरक्षा और विश्वास दोनों जगाए।
■■ विश्वास और बदलाव की नई शुरुआत
दौरे के अंत में जिलाधिकारी मनीष कुमार ने ग्रामीणों से वादा किया कि तीन महीने बाद वह स्वयं वापस आएंगे, और देखेंगे कि विकास की गति कितनी बदली है। उनके इस आश्वासन ने खिरद्वारी के लोगों में भरोसे की नई किरण जगाई है।
खिरद्वारी गाँव के लिए यह सिर्फ एक प्रशासनिक शिविर नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और संवेदनशीलता की नई सुबह साबित हुआ।
Tags :
अच्छी पहल